क्यों मनाते है गणेश चतुर्थी?

  1. मुंबई |  चलिए आज हम आपको  बताते  है  हुवा  ये  की  एक दिन गणेश  जी  चूहे की सवारी करते  हुए  फिसल गये और चंद्रमा यानी अपने चंदा मामा ने उन्हें  देख लिया और हसने लगे और इस बात गणेश जी काफी क्रोधित हो गए हो गये और बोले हे चन्द्र अब तुम किसी के देखने योग्य नहीं रह जावोगे यदि किसी ने  तुम्हे देख लिया तो पाप का भागी होगा ! श्राप देखकर गणेश जी वहा से चले गए और चंद्रमा दुखी हो गए और मन ही मन चिंतित होने लगे की मैंने ये क्या कर दिया ?चन्द्रमा के दर्शन न कर पाने के श्राप से देवता गण भी दुखी हो गये ! उसके बाद भगवन इंद्र के  साथ सभी देवताओं ने  गजानन की  स्तुति शुरू कर दी  देवताओं की  स्तुति से  गणेश जी प्रसन्न हो गये और बरदान मागने को कहा | सभी देवताओं ने कहा हे प्रभु चंद्रमा को पहले जैसा कर दो इस पर गणेश जी ने  कहा मई श्राप तो वापस नहीं ले सकता पर कुछ  इसमें  बदलाव कर सकता हूँ जो ब्यक्ति  जाने अनजाने में भी भद्र शुक्ल चतुर्थी को चद्रमा के दर्शन कर लेगा वह अभिशप्त  होगा  और उस पर गलत आरोप लगाये जायेंगे यदि इस दिन दर्शन हो जाये तो इस पाप से बचने के लिए निम्न मंत्र का पथ करे |                                                                                                                                              ” सिंह प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः                                                                            सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्रोष स्यमन्तकः”
देवताओ ने चंद्रमा  से कहा तुमने  गणेश पर हस कर बहुत बड़ा पाप किया है पर हम देवताओ ने मिलकर उनकी स्तुति की जिससे प्रसन हो कर उन्होंने सिर्फ साल में एक बार भाद्र शुक्ल चतुर्थी  को अदर्शनीय रहने का वचन देकर अपना श्राप अत्यन्त आशिंक कर दिया है। अब आप भी गणेश जी के शरण में  जाकर  संसार को अपनी     शीतलता प्रदान करे ! इसलिए हम गणेश चतुर्थी मनाते है इतनी धूम धाम से

 

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