होली कब है 2019 : और होली क्यों मनाई जाती है जरुर जान ले

होली कब है 2019

होली कब है 2019

tyohartop.com मुंबई | नमस्कार दोस्तों त्योहारों के सबसे टॉप त्यौहार होली में tyohartop.com  की तरफ से आप लोगो को होली की बहुत बहुत शुभकानाये | दोस्तों होली कब है 2019 ये जानना जरुरी तो है  हो सकता है  आप को पता  भी हो होली कब है 2019

 

लेकिन दोस्तों होली का मज़ा जब तक चुनरी भीगे न रंग गुलाल उड़े न गुझिया मुह में घुसे ना तब तक मज़ा कहा इसलिए दोस्तों आज हम आपको होली कब है 2019 के  साथ – साथ  रंगों और गुलाल के इस्तेमाल का तरीका और होली  क्यों  मनाया  जाता है? इस  बारे  बतायेंगे |

होली कब है 2019

दोस्तों जैसा की आप जानते है मार्च का महिना शुरू हो गया है और हिन्दू कैलेण्डर के हिसाब से हम इसे फाल्गुन का महिना कहते है अगर हम हिन्दू कैलेण्डर के हिसाब से देखे तो इस बार होलिका दहन  20 मार्च और होली 21 मार्च को पुरे देश में धूमधाम से मनाई जाएगी | 

 

होली में क्या क्या सावधानिया रखना जरुरी है ?

 

होली खेलने से पहले आप अपने शरीर में नारियल का तेल लगा ले बालों में भी लगाकर रखे 

हो सके तो पुरे शरीर को ढककर रखे पुरे बांह के कपडे अवश्य पहने 

भाँग और शराब से दूर रहे नहीं तो ये रंग में भंग कर देगा और त्यौहार का मज़ा किरकिरा हो जायेगा |

रंग छुडाते समय अपने मुह और आँख को बंद रखे और ध्यान रखे की आपके कान में वह पानी न जाये 

अगर आपके बच्चे रंग खेलने जाये तो किसी बड़े बुजुर्ग का साथ में रहना जरुरी रहता है 

रंग छुडाने के टाइम आप साबुन का इस्तेमाल ज्यादा न करे इससे आपकी त्वचा छिल सकती है उर जलन हो सकती है |

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होली क्यों मनाया जाता है 

होली क्यों मनाया जाता है इसके पीछे वैसे देखा जाये तो बहुत सी सारी मान्यता है इनमे से एक है होलिका और प्रहलाद की कहानी | कहा जाता है प्रह्लाद भगवन बिष्णु का बहुत बड़ा भक्त था लेकिन बिडम्बना यह थी की वह राक्षस राज हिरनकश्यप का पुत्र था और उसे कतई मंजूर नहीं था की उसका बेटा भगवान बिष्णु का गुणगान करे इसलिए उसने प्रहलाद को कई बार समझाया पर प्रह्लाद नहीं माना |

 

राक्षस राज हिरनकश्यप अपने आप को ही भगवन मानता था और कहता था मेरी पूजा करो परन्तु उसके घर में ही उसका पुत्र उसके दुश्मन भगवान् बिष्णु का परम भक्त निकल गया |

यह उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था इसलिए उसने अपने पुत्र को मारने का कई बार प्रयास किया परन्तु हर बार वह असफल रहा |

इसके पश्चात् उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया | हिरनकश्यप की बहन होलिका को अग्नि देवता का बरदान था आग उसे कुछ नहीं कर सकती थी |

 

इसलिए उसने अपनी बहन को प्रह्लाद को गोद में लेकर लकड़ी और घास फूस से बने टीले पर बैठने का आदेश दिया | और जब वह आग में बैठी प्रह्लाद को गोद में लेकर प्रह्लाद ने भगवान् बिष्णु का जप करना शुरू किया और हुवा इसका उल्टा,होलिका ही उस आग में भस्म हो गयी | कहा जाता है इसलिए हमलोग होलिका दहन के बाद होली मनाते है | 

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