chhath puja 2018: छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है

chhath puja 2018: छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है

कार्तिक माह छठ  पूजा (kartik chhath puja date 2018)

छठ पूजा chhath puja हिन्दुओं के त्योहारों में से एक त्यौहार है यह पर्व उत्तर प्रदेश, बिहार,में मुख्यतः मनाया जाता है|लोगो को इस त्यौहार में बड़ी आस्था रहती है कहा जाता है की इस पर्व पर इन्सान जो भी छठ मैया से मागता है कहते है उसे छठ मैया पूरी कर देती है अब धीरे-धीरे लोगो की आस्था इस त्यौहार के प्रति और भी राज्यों में बढ़ रहा है मुख्य रूप से यह त्यौहार सूर्य देव की उपासना के लिए जाना जाता है                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                        पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा कहा जाता है की छठ मैया जो है सूर्य देव की बहन है |कहा जाता है की छठ पूजा में सूर्य देव की उपासना करने से छठ माता प्रसन्न होती है और लोगो की मन्नते पूरी हो जाती है घर में सुख समृद्धि आती है kartik chhath puja  november2018 date


कब मनाया जाता है छठ पर्व?         

छठ पूजा वैसे तो साल में दो बार मनाया जाता है जिसमे पहला जो है चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की षष्टी तिथि को और दूसरा जो है कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की षष्टि तिथि को|हालाँकि चैत्र माह की छठ पूजा से ज्यादा कार्तिक माह की छठ पूजा मनाई जाती है यह महापर्व चार दिनों तक मनाया जाता है इस महापर्व को हम छठ पूजा,छठी माई,डाला छठ,सूर्य षष्टि छठी पूजा आदि नामो से जानते है chhath puja 2018 bihar         


छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है?

छठ पूजा में लोगो की इतनी आस्था है की वे छठ पूजा में जमीन पर लेट -लेट कर घाट पर जाते है यह व्रत एकदम निरजल होता है|लोग इस पूजा को इतना बिधिवत करते है की अपनी पूरी आस्था झोक देते है लोग देश-बिदेश से वापस अपने घर आकर इस पूजन को करते है ताकि उनके पूरी परिवार को इस पूजा का फल मिल सके.                                                                                                                            इसे भी पढ़े छठ पूजा बिशेष


यह पर्व अपने आप में एक महान पर्व है इस व्रत को महिलाये संतान सुख के लिए भी रखती है कहा जाता है यह व्रत में इतनी शक्ति होती है की निसंतान को संतान की सुख प्राप्त होती है छठ माता साक्षात् अपनी कृपा दृष्टि बरसाती है लोग और भी कई मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए छठ का व्रत रखते है              इसे भी पढ़े suzuki launch new bike v strom:तो तैयार हो जाइये इसके दमदार फीचर्स का दीदार करने के लिए2018/10/17


छठ पूजा 2018 नवम्बर  chhath puja 2018 november

कार्तिक छठ पूजा 2018 11 नवम्बर से 14 नवम्बर तक मनाई जाएगी| 13 नवम्बर 2018 मंगलवार के दिन षष्टि तिथि का प्रारंभ 01:50 मिनट पर होगा जिसका समापन 14 नवम्बर बुधवार के दिन 04:22 मिनट पर होगा 


कार्तिक छठ पूजा 2018 kartik chhath puja november 2018

11 नवम्बर 2018 रविवार तिथि चतुर्थी के दिन नहाय खाय होगा                                                    12 नवम्बर 2018 सोमवार  तिथि पंचमी के दिन लोहंडा और खरना होगा|                                    13 नवम्बर 2018 मंगलवार तिथि षष्टि के दिन संध्या अर्ध्य होगा                                                    14 नवम्बर 2018  बुधवार  तिथि सप्तमी के दिन उषा अर्ध्य  यानि पारण होगा 


chhath puja date in hindi

छठ पर्व में सुहागिन स्त्रियाँ पूरा श्रृंगार करती है और अपने परिवारजन, पुत्र,पति आदि के लिए उपवास रखती है इस पर्व को मुख्य रूप से बिहार,उत्तर प्रदेश, और नेपाल के भी कुछ इलाको में मनाया जाता है|जैसा की अपने ऊपर देखा यह महापर्व चार दिन का होता है जिसे हम नहाय खाय ,लोहडा और खरना,संध्या अर्ध्य और उषा अर्ध्य के रूप में  मनाया जाता है चलिए हम आपको इसकी विस्तृत जानकारी दे रहे है जिसे पढ़कर आप बहुत कुछ जान लेंगे इस पर्व के बारे में                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                   पहला दिन नहाय खाय  11  नवम्बर  2018 : छठ पर्व के पहले दिन को नहाय खाय कहा जाता है|इस दिन जो है औरते अपने घर की साफ सफाई करती है और उसके बाद स्नान करके पुरे तरीके से शाकाहारी भोजन ग्रहण करती है|इस दिन को कद्दू भात भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन चावल, चने की दाल,और लौकी यानि (कद्दू घिया )की सब्जी को बड़े नियम धर्म से बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करती है और इस व्रत की शुरुवात करती है|


लोहडा और खरना 12 नवम्बर 2018 :छठ पूजा के दुसरे दिन को हम लोहडा और खरना के रूप में मनाते है इस दिन छठ का व्रत करने वाले दिन भर व्रत रहने के बाद शाम को भोजन ग्रहण करते है जिसे खरना कहते है खरना का प्रसाद चावक को गन्ने के रस में मिलाकर या चावल को दूध में मिलाकर चावल का पिट्ठा और चुपड़ी रोटी बनायीं जाती है और शाम के समय छठ माता का पूजा करने के बाद जो व्रत रहता है पहले वह इस प्रसाद को ग्रहण करता है|उसके बाद परिवार के सभी लोग उसे भोजन के रूप में ग्रहण करते है


पहला अर्ध्य यानि संध्या अर्ध  13 नवम्बर 2018 : इस दिन इस पूजा में दुनिया भर का फल इकट्ठा करते है इसमें नाना प्रकार के फल रखे जाते है फल जो है डलिया में रखे जाते है और नदी किनारे घाट पर जाया जाता है और वह पर औरते सूप में फल और पूजा का बाकि सामान लेकर नदी के जल में खड़ी हो जाती है और सूर्य भगवन को अर्घ्य देती है जब सूर्य अस्त हो जाते है तो वह जल से बाहर आती है और वापस घर जाती है और रात में छठ मैया का गीत गाती है


सुबह का अर्ध्य  14 नवम्बर: इस दिन व्रती को सूर्य उगने से पहले ही घाट पर पहुचना होता है जहा ओ तीसरे दिन गए थे|इस दिन जो है उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और सूर्य देवता से मनोकामना पूर्ति के लिए बरदान माँगा जाता है परिवार के अन्य सदस्य जो है वे व्रती के साथ पूजा करते है अर्घ्य देते है और फिर घर वापस आते है छठी व्रत जो है इन चार दिनों का कठिन व्रत उस दिन परं करके तोड़ते है घर में प्रसाद का आदान प्रदान होता है यह व्रत जो है 36 घंटे के लम्बे समय के बाद टूटता है यह पर्व आपको मुबई के जुहू,चपाटी,के बिच पर भी देखने को मिल जायेगा

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