makar sankranti 2019 ! मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है

tyohartop.com मुंबई . नमस्कार दोस्तों आज हम आपको मकर संक्रांति के बारे में बताने वाले है की मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है दोस्तों हर आप लोग जनवरी के महीने में मकर संक्रांति मनाते होंगे लेकिन अपने कभी सोचा है की मकर संक्रांति मनाई क्यों जाती है तो चलिए दोस्तों आज हम आप लोगो को इसके बारे में बता रहे है |

हेल्थ टिप्स  इसे भी पढ़े अपने सेहत का कैसे ख्याल रखे जरुर जानिए

 

वैसे देखा जाये तो मकर संक्रांति हर साल लगभग 14 जनवरी को पड़ती है लेकिन इस बार की मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी |और इसी बजह से प्रयागराज में शुरू होने वाला कुम्भ इस बार 15 जनवरी को शुरू होगा | कुम्भ का पहला स्नान 15 जनवरी से शुरू होगा |

क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति और क्या है इसका महत्व 

ऐसा माना जाता है की, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश कर जाते है इसलिए इस संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है और जब राशि बदलती है तो इसका प्रभाव आप सूर्य देव पर देख सकते है इस दिन से सूर्य देव जो है उत्तर दिशा से दक्षिण दिशा में प्रवेश करते है | मकर संक्रांति मनाई क्यों जाती है

 

मकर संक्रांति के दिन खरमास का समाप्ति हो जाता है और सुभ कार्यो का आरम्भ हो जाता है |महाभारत काल में पितामह भीष्म ने प्राण त्यागने के लिए इसी दिन को चुना था इसी के साथ ही इसी दिन माँ गंगा भागीरथ के पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम होते हुए सागर में जा मिली थी | ऐसी मान्यता है की इस दिन स्नान के बाद पृथ्वी पर फिर से सारे शुभ कार्य शुरू हो जाते है |

 

गंगा स्नान करने के महत्व 

माना जाता है इस दिन गंगा यमुना सरस्वती के संगम में सभी देवी देवता स्नान करने आते है इसलिए इस दिन स्नान करना शुभ माना जाता है 

मकर संक्रांति पर दान करने के महत्व 

ऐसा माना जाता है इस दिन किया गया गया दान बहुत ही पुण्य का होता है इस दिन किया गया दान सौ गुना होकर वापस लौटता है इसलिए इस दान को बहुत ही जरुरी समझा जाता है | मकर संक्रांति मनाई क्यों जाती है

    मकर संक्रांति में तिल का महत्व 

पौराणिक ग्रंथो के अनुसार शनि देव को उनके पिता सूर्य देव पसंद नहीं करते थे और इसके कारण सूर्य देव ने शनि और उनकी माता जी छाया को अपने से  अलग कर दिया | यह बात शनि देव और उनकी माता को नागवार गुजरी और उन्होंने सूर्य देव को कुष्ठ रोग होने का श्राप दे दिया है |इसके बाद सूर्य के दुसरे पुत्र यमराज ने अपने पिता सूर्य देव के लिए तपस्या की जिससे सूर्य देव इससे मुक्त हो गये और इसके बाद वे क्रोधित होकर शनि देव का घर ‘कुम्भ ‘ उसे जला दिया | इससे उन दोनों बहुत दुखी हुए |

 

यमराज से उन दोनों का दुःख देखा नहीं गया और उन्होंने अपने पिता सूर्य देव को समझाया | और यमराज की बात मन कर सूर्य देव उनके घर कुम्भ मिलने गये पर वह पर सारा जलकर नष्ट हो गया था | और वह पर सिर्फ काला तिल रह गया था और उसी काले तिल से शनि देव ने सूर्य देव  की पूजा की जिससे वे प्रसन्न होकर शनि देव को ” मकर ” नाम का घर दिया जो आज राशि के नाम से हम जानते है और तभी से मकर संक्रांति पर काले तिल का काफी महत्व माना  जाता है |

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *